RSS

दीपावली

दीप, मोम और लड़ियों से,
रोशन है हर एक कोना.
कई पेट अब भी भूखा है,
और, लक्ष्मी फांक रही है सोना.

लक्ष्मी आज घर-घर आई,
पर उनका क्या जो बेघर हैं?
कईयों का आज किस्मत पलटा,
कईयों का होगा जो होगा होना.

चलो हम सब मिल कर “पाठक”,
एक संकल्प का दीप जलाते हैं.
आज जो खुशियों को तरसे हैं,

कल उनकी खुशियाँ लाते हैं...

  • Digg
  • Del.icio.us
  • StumbleUpon
  • Reddit
  • RSS

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें